Ramayana Tour Package · Companion Scripture Guide

Ramayana Yatra Shlokas & Chaupais — a Verse for Every Sacred Stop

For every destination on our Ramayana tour package — the complete Shri Ramayana Yatra circuit along the Ram Van Gaman Path — here is the shloka from the Valmiki Ramayana or chaupai from the Ramcharitmanas that belongs to that very place and event, with its prasang (context), Hindi bhavarth and English meaning. Every verse is verified against source editions. Recite them at the spot itself — that is the heart of a Ramayan circuit yatra.

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Day 1 · Chandkhuri — Mata Kaushalya Janmabhoomi

बंदउँ कौसल्या दिसि प्राची। कीरति जासु सकल जग माची॥
रामचरितमानस · बालकाण्ड, दोहा १५ की चौपाई (वन्दना)
प्रसंग: तुलसीदास जी मंगलाचरण में माता कौसल्या की वन्दना पूर्व दिशा के रूप में करते हैं, जहाँ से राम-रूपी सुन्दर चन्द्रमा (ससि चारू) प्रकट हुआ। चंदखुरी वही कौसल्या-भूमि है, उनका जन्मस्थान और विश्व का एकमात्र कौसल्या मंदिर।
हिंदी भावार्थ: मैं कौसल्या रूपी पूर्व दिशा की वन्दना करता हूँ, जिनकी कीर्ति समस्त जगत में व्याप्त है, जहाँ से राम-रूपी सुन्दर चन्द्रमा का उदय हुआ।
Meaning: I bow to Mother Kausalya, the eastern sky whose glory fills all the world, whence rose the beautiful moon that is Ram.
कौसल्या शुशुभे तेन पुत्रेणामिततेजसा। यथा वरेण देवानामदितिर्वज्रपाणिना॥
वाल्मीकि रामायण · बालकाण्ड १.१८.१२
प्रसंग: राम-जन्म के वर्णन में महर्षि वाल्मीकि स्वयं माता कौसल्या की महिमा गाते हैं, देवमाता अदिति से उनकी तुलना करते हुए।
हिंदी भावार्थ: अमित तेजस्वी उस पुत्र से कौसल्या वैसे ही शोभित हुईं, जैसे वज्रधारी इन्द्र से देवमाता अदिति शोभित हुई थीं।
Meaning: With that son of boundless splendour Kausalya shone, as mother Aditi once shone with Indra, wielder of the thunderbolt.
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Day 2 · Amarkantak — Narmada Udgam

सबिन्दुसिन्धुसुस्खलत्तरङ्गभङ्गरञ्जितं द्विषत्सु पापजातजातकारिवारिसंयुतम्। कृतान्तदूतकालभूतभीतिहारिवर्मदे त्वदीयपादपङ्कजं नमामि देवि नर्मदे॥
नर्मदाष्टकम्, श्लोक १ · आदि शंकराचार्य
प्रसंग: आदि शंकराचार्य ने माँ नर्मदा की स्तुति में आठ श्लोकों का नर्मदाष्टकम् रचा; प्रत्येक श्लोक "त्वदीयपादपङ्कजं नमामि देवि नर्मदे" की टेक पर पूर्ण होता है। अमरकंटक वही उद्गम-स्थल है जहाँ आज आप नर्मदा के दर्शन करेंगे।
हिंदी भावार्थ: बिन्दुयुक्त सागर-सी उछलती तरंग-भंगियों से शोभित, पापियों के पाप-समूह का नाश करने वाले जल से युक्त, यमदूतों और काल के भय का हरण कर रक्षा देने वाली हे देवी नर्मदे! मैं आपके चरण-कमलों को प्रणाम करता हूँ।
Meaning: Adorned with leaping sea-like waves, her waters destroying the sins of the sinful, she who takes away the terror of death's messengers, O Goddess Narmada, I bow to your lotus feet.
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Day 3 · Towards Chitrakoot (via Satna)

चित्रकूट गिरि करहु निवासू। तहँ तुम्हार सब भाँति सुपासू॥
रामचरितमानस · अयोध्याकाण्ड, दोहा १३० की चौपाई
प्रसंग: वनवास-पथ पर श्रीराम ने महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में पूछा, "मैं कहाँ निवास करूँ?" उत्तर में वाल्मीकि जी ने चित्रकूट बताया। आज की यात्रा उसी चित्रकूट की ओर बढ़ रही है।
हिंदी भावार्थ: महर्षि वाल्मीकि ने श्रीराम से कहा, चित्रकूट पर्वत पर निवास कीजिए; वहाँ आपके लिए सब प्रकार से सुख-सुविधा है।
Meaning: Sage Valmiki counsels Ram: make your abode on Chitrakoot hill, there you shall find ease of every kind.
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Day 4 · Chitrakoot — Kamadgiri & Bharat Milap

न राज्याद्भ्रंशनं भद्रे न सुहृद्भिर्विना भवः। मनो मे बाधते दृष्ट्वा रमणीयमिमं गिरिम्॥
वाल्मीकि रामायण · अयोध्याकाण्ड २.९४.३
प्रसंग: चित्रकूट पर पर्णकुटी बसाकर श्रीराम सीता जी से कहते हैं, यह पर्वत इतना रमणीय है कि राज्य का दुःख भी भूल जाता है। यहीं भरत-मिलाप हुआ और भरत जी चरण-पादुका लेकर अयोध्या लौटे।
हिंदी भावार्थ: हे भद्रे! इस रमणीय पर्वत को देखकर न राज्य छिन जाने का दुःख मुझे सताता है, न प्रियजनों के बिछोह का।
Meaning: Beloved, gazing on this delightful hill, neither the loss of my kingdom nor separation from dear ones troubles my mind.
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Day 5 · Shringverpur & Prayagraj — Kevat Prasang

मागी नाव न केवटु आना। कहइ तुम्हार मरमु मैं जाना॥
रामचरितमानस · अयोध्याकाण्ड, दोहा १०० की चौपाई (केवट प्रसंग)
प्रसंग: श्रृंगवेरपुर के इसी गंगा-तट पर केवट ने प्रभु से कहा, पहले चरण पखारने दीजिए, तभी नाव पर चढ़ाऊँगा; आपकी चरण-रज ने पत्थर को अहल्या बना दिया था, कहीं मेरी नाव भी कुछ और न बन जाए!
हिंदी भावार्थ: नाव माँगने पर केवट नहीं लाता; कहता है, प्रभु, मैं आपका मर्म जान गया हूँ।
Meaning: Asked for his boat, the ferryman would not bring it, 'Lord, I know your secret,' he says; first he must bathe those holy feet.
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Day 6 · Ayodhya — Arrival in Avadhpuri

बंदउँ अवध पुरी अति पावनि। सरजू सरि कलि कलुष नसावनि॥
रामचरितमानस · बालकाण्ड (वन्दना)
प्रसंग: तुलसीदास जी मंगलाचरण में अवधपुरी और सरयू की वन्दना करते हैं, आज उसी पावन नगरी में आपका प्रवेश है।
हिंदी भावार्थ: मैं अत्यन्त पावन अवधपुरी की और कलियुग के पापों का नाश करने वाली सरयू नदी की वन्दना करता हूँ।
Meaning: I bow to the most holy city of Avadh, and to the Sarayu whose waters wash away the sins of the age.
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Day 7 · Ayodhya — Ram Janmabhoomi

भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी। हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी॥
रामचरितमानस · बालकाण्ड, दोहा १९१ का छंद (राम जन्म स्तुति)
प्रसंग: चैत्र शुक्ल नवमी को इसी जन्मभूमि पर प्रभु माता कौसल्या के सम्मुख प्रकट हुए, यह छंद रामलला के जन्मोत्सव का हृदय है, जो राम मंदिर में आज भी गूँजता है।
हिंदी भावार्थ: दीनों पर दया करने वाले, कौसल्या के हितकारी कृपालु प्रभु प्रकट हुए; उनके अद्भुत रूप का विचार कर माता हर्षित हो गईं।
Meaning: The All-Merciful, friend of the humble and joy of Kausalya, became manifest; beholding that wondrous form, the mother was filled with rapture.
ततो यज्ञे समाप्ते तु ऋतूनां षट् समत्ययुः। ततश्च द्वादशे मासे चैत्रे नावमिके तिथौ॥
वाल्मीकि रामायण · बालकाण्ड १.१८.८ to ९
प्रसंग: महर्षि वाल्मीकि राम-जन्म की तिथि लिखते हैं, चैत्र नवमी, पुनर्वसु नक्षत्र। इसी तिथि को यह नगरी आज भी रामनवमी के रूप में मनाती है।
हिंदी भावार्थ: यज्ञ पूर्ण होने पर छह ऋतुएँ बीतीं; बारहवें मास में चैत्र शुक्ल नवमी तिथि को (पुनर्वसु नक्षत्र में प्रभु का जन्म हुआ)।
Meaning: Six seasons after the sacrifice, in the twelfth month, on the ninth of Chaitra, under Punarvasu, the Lord was born.
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Day 8 · Rail Day — Ayodhya to Mithila

राम नाम मनिदीप धरु जीह देहरीं द्वार। तुलसी भीतर बाहेरहुँ जौं चाहसि उजिआर॥
रामचरितमानस · बालकाण्ड, दोहा २१
प्रसंग: नाम-महिमा प्रकरण का प्रसिद्ध दोहा, राम की नगरी से सीता की जन्मभूमि तक के इस रेल-दिवस के लिए तुलसीदास जी का सूत्र: जिह्वा पर राम-नाम का दीप जलाए रखिए।
हिंदी भावार्थ: राम-नाम रूपी मणि-दीपक को जीभ रूपी देहरी के द्वार पर रखो, भीतर और बाहर दोनों ओर उजाला चाहते हो तो यही उपाय है।
Meaning: Set the jewel-lamp of Ram's name on the threshold of the tongue, says Tulsidas, and there shall be light both within and without.
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Day 9 · Mithila — Ahilya Sthan & Janaki Janmabhoomi

परसत पद पावन सोकनसावन प्रगट भई तपपुंज सही। देखत रघुनायक जन सुखदायक सनमुख होइ कर जोरि रही॥
रामचरितमानस · बालकाण्ड (अहल्या स्तुति, छंद)
प्रसंग: गौतम ऋषि के आश्रम में शापित अहल्या श्रीराम के चरण-स्पर्श से मुक्त हुईं, दरभंगा क्षेत्र का अहिल्या स्थान परम्परा से वही भूमि है, जहाँ आज दर्शन होंगे।
हिंदी भावार्थ: श्रीराम के पावन, शोकनाशक चरणों का स्पर्श पाते ही अहल्या तपोमूर्ति रूप में प्रकट हुईं और भक्त-सुखदायक रघुनाथ जी के सम्मुख हाथ जोड़े खड़ी रहीं।
Meaning: At the touch of the Lord's holy, sorrow-dispelling feet, Ahalya rose true to her penance and stood before him with folded hands.
जनकसुता जग जननि जानकी। अतिसय प्रिय करुनानिधान की॥
रामचरितमानस · बालकाण्ड, दोहा १८ से पूर्व चौपाई (सीता-वन्दना)
प्रसंग: तुलसीदास जी की सीता-वन्दना, मिथिला वही धरती है जहाँ जनकनन्दिनी प्रकट हुईं, जहाँ धनुष टूटा और स्वयंवर रचा गया।
हिंदी भावार्थ: जनक की पुत्री, जगत की माता जानकी करुणानिधान श्रीराम को अत्यन्त प्रिय हैं।
Meaning: Janaki, daughter of Janak, mother of the world, is dearest to the Lord, the treasury of compassion.
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Day 10 · To Panchavati — the Godavari

इयं गोदावरी रम्या पुष्पितैस्तरुभिर्वृता। हंसकारण्डवाकीर्णा चक्रवाकोपशोभिता॥
वाल्मीकि रामायण · अरण्यकाण्ड ३.१५.१२
प्रसंग: अगस्त्य मुनि के बताए मार्ग से पंचवटी पहुँचकर श्रीराम लक्ष्मण जी को रमणीय गोदावरी दिखाते हैं, आज आप उसी गोदावरी के तट पर पहुँच रहे हैं।
हिंदी भावार्थ: यह रमणीय गोदावरी फूले हुए वृक्षों से घिरी है; हंसों और कारण्डवों से भरी, चकवों से सुशोभित है।
Meaning: Here flows the lovely Godavari, ringed by blossoming trees, alive with swans, shining with chakravaka birds.
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Day 11 · Panchavati — Sita Haran Bhoomi

अभिगम्य सुदुष्टात्मा राक्षसः काममोहितः। जग्राह रावणः सीतां बुधः खे रोहिणीमिव॥
वाल्मीकि रामायण · अरण्यकाण्ड ३.४९.१६
प्रसंग: पंचवटी, यहीं स्वर्ण-मृग की माया रची गई, यहीं से रावण ने सीता जी का हरण किया। महाकाव्य का निर्णायक मोड़ इसी भूमि पर घटा; सीता गुफा और तपोवन उसी कथा के साक्षी हैं।
हिंदी भावार्थ: काममोहित दुष्टात्मा राक्षस रावण ने समीप जाकर सीता जी को वैसे ही हर लिया, जैसे आकाश में बुध रोहिणी को ग्रस लेता है।
Meaning: The evil-souled Ravana, maddened by desire, seized Sita as Budha seizes the star Rohini in the sky.
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Day 12 · Kishkindha — Hanuman Milan

को तुम्ह स्यामल गौर सरीरा। छत्री रूप फिरहु बन बीरा॥
रामचरितमानस · किष्किन्धाकाण्ड, दोहा १ से पूर्व चौपाई
प्रसंग: ऋष्यमूक पर्वत के पास सुग्रीव के भेजे हनुमान जी विप्र (ब्राह्मण) रूप धरकर राम-लक्ष्मण से पहली बार मिले, प्रभु से हनुमान जी की यह प्रथम वाणी है, और वह भूमि यही किष्किन्धा (हम्पी क्षेत्र) है।
हिंदी भावार्थ: हनुमान जी ने पूछा, श्यामल और गौर शरीर वाले आप दोनों कौन हैं, जो क्षत्रिय रूप में वन में वीरों की भाँति विचर रहे हैं?
Meaning: 'Who are you, heroes, one dark, one fair, wandering these woods in warrior's garb?' Hanuman's first words to his Lord.
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Day 13 · Anjanadri — Hanuman Janmasthan

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥
हनुमान चालीसा, समापन दोहा · गोस्वामी तुलसीदास
प्रसंग: अंजनी-पुत्र पवनतनय का जन्मस्थान यही अंजनाद्रि पर्वत माना जाता है, जिसकी सीढ़ियाँ आज आप चढ़ेंगे, चालीसा का समापन दोहा उन्हीं की वन्दना है।
हिंदी भावार्थ: हे पवनपुत्र, संकटहारी, मंगलमूर्ति हनुमान! राम-लक्ष्मण-सीता सहित मेरे हृदय में निवास कीजिए।
Meaning: O son of the Wind, remover of peril, embodiment of blessing, dwell in my heart with Ram, Lakshman and Sita.
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Day 14 · Tirupati — the Suprabhatam Shloka

कौसल्या सुप्रजा राम पूर्वा संध्या प्रवर्तते। उत्तिष्ठ नरशार्दूल कर्तव्यं दैवमाह्निकम्॥
वाल्मीकि रामायण · बालकाण्ड १.२३.२
प्रसंग: सिद्धाश्रम-यात्रा में प्रातःकाल विश्वामित्र जी सोए हुए राम को इन्हीं शब्दों से जगाते हैं। यही श्लोक तिरुमला में वेंकटेश सुप्रभातम् का प्रथम श्लोक है, प्रतिदिन ब्रह्ममुहूर्त में भगवान वेंकटेश्वर को इसी से जगाया जाता है।
हिंदी भावार्थ: हे कौसल्या के सुपुत्र राम! पूर्व दिशा में उषा हो रही है; हे नरश्रेष्ठ, उठिए, दैनिक दैविक कर्तव्य करने हैं।
Meaning: O Rama, blessed son of Kausalya, dawn breaks in the east; arise, tiger among men, the sacred duties of the day await.
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Day 15 · Thiruppukuzhi — Jatayu Moksha

मया त्वं समनुज्ञातो गच्छ लोकाननुत्तमान्। गृध्रराज महासत्त्व संस्कृतश्च मया व्रज॥
वाल्मीकि रामायण · अरण्यकाण्ड ३.६८.३०
प्रसंग: सीता जी की रक्षा में प्राण देने वाले गृध्रराज जटायु का श्रीराम ने पुत्रवत् अंतिम संस्कार किया। तिरुप्पुकुझी की परम्परा इसी प्रसंग की है, यहाँ प्रभु जटायु को गोद में लिए विराजते हैं।
हिंदी भावार्थ: हे महापराक्रमी गृध्रराज! मैंने स्वयं तुम्हारा अंतिम संस्कार किया है; मेरी आज्ञा से तुम सर्वोत्तम लोकों को जाओ।
Meaning: O mighty king of vultures, with my own hands I have given you the last rites; with my blessing rise now to the highest worlds.
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Day 16 · Pamban — the Rama Setu

दशयोजनविस्तीर्णं शतयोजनमायतम्। ददृशुर्देवगन्धर्वा नलसेतुं सुदुष्करम्॥
वाल्मीकि रामायण · युद्धकाण्ड, सर्ग २२ (नल-सेतु)
प्रसंग: नल के नेतृत्व में वानर सेना ने समुद्र पर सौ योजन लम्बा सेतु बाँधा, देवता भी देखकर चकित रह गए। पम्बन पुल से रामेश्वरम द्वीप में प्रवेश करते हुए आप उसी राम-सेतु की भूमि की ओर बढ़ते हैं।
हिंदी भावार्थ: देवताओं और गन्धर्वों ने दस योजन चौड़े और सौ योजन लम्बे, अत्यन्त दुष्कर नल-सेतु के दर्शन किए।
Meaning: Gods and gandharvas beheld Nala's bridge, ten yojanas wide, a hundred long, a marvel scarcely possible to build.
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Day 17 · Rameshwaram — Jyotirlinga Sthapana

लिंग थापि बिधिवत करि पूजा। सिव समान प्रिय मोहि न दूजा॥
रामचरितमानस · लंकाकाण्ड, दोहा २ से पूर्व चौपाई
प्रसंग: सेतु की सुन्दर रचना पूर्ण देखकर श्रीराम ने यहीं मुनियों को बुलाकर विधिवत शिवलिंग स्थापित किया और घोषणा की, शिव समान प्रिय कोई नहीं। वही रामनाथस्वामी ज्योतिर्लिंग आज आपके सम्मुख होगा।
हिंदी भावार्थ: श्रीराम ने विधिपूर्वक शिवलिंग की स्थापना और पूजा कर कहा, शिव के समान मुझे और कोई प्रिय नहीं।
Meaning: Establishing the linga with due rites, Ram declared: none is as dear to me as Shiva.
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Day 18 · To Hyderabad — Mangal Pravesh

प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयँ राखि कोसलपुर राजा॥
रामचरितमानस · सुन्दरकाण्ड, दोहा ५ से पूर्व चौपाई
प्रसंग: लंका की द्वारपालिका लंकिनी ने हनुमान जी का पराक्रम देख उन्हें आशीर्वाद देकर नगर-प्रवेश दिया, "कोसलपुर के राजा को हृदय में रखकर प्रवेश करो, सब कार्य सिद्ध होंगे।" नये नगर में मंगल-प्रवेश के लिए युगों से यही चौपाई स्मरण की जाती है।
हिंदी भावार्थ: हृदय में कोसलपुर के राजा श्रीराम को धारण कर नगर में प्रवेश करो, सब कार्य सिद्ध होंगे।
Meaning: Enter the city with the King of Kosala enthroned in your heart, and every task shall prosper, Lankini's blessing to Hanuman at the gates of Lanka.
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Day 19 · Srisailam — Mallikarjuna Jyotirlinga

सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्। उज्जयिन्यां महाकालमोङ्कारममलेश्वरम्॥
द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम्, श्लोक १ · आदि शंकराचार्य
प्रसंग: आदि शंकराचार्य के द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र का प्रथम श्लोक, श्रीशैल पर्वत का मल्लिकार्जुन बारह ज्योतिर्लिंगों में द्वितीय है। आज संध्या उसी के दर्शन हैं; श्रीशैलम शक्तिपीठ भी है।
हिंदी भावार्थ: सौराष्ट्र में सोमनाथ, श्रीशैल पर मल्लिकार्जुन, उज्जयिनी में महाकाल और ॐकारेश्वर-अमलेश्वर, इन ज्योतिर्लिंगों का मैं स्मरण करता हूँ।
Meaning: Somnath in Saurashtra, Mallikarjuna upon Srishaila, Mahakala at Ujjain, Omkareshwar-Amaleshwar, thus begins the remembrance of the twelve Jyotirlingas.
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Day 20 · Srisailam — Sahasralinga & Ram-Shiva Aikya

संकरप्रिय मम द्रोही सिव द्रोही मम दास। ते नर करहिं कलप भरि घोर नरक महुँ बास॥
रामचरितमानस · लंकाकाण्ड, दोहा २
प्रसंग: रामेश्वरम में शिवलिंग-स्थापना के तुरन्त बाद श्रीराम की घोषणा, राम और शिव अभिन्न हैं। श्रीशैल का सहस्रलिंग, जिसे राम-प्रतिष्ठित माना जाता है, इसी राम-शिव ऐक्य का जीवित साक्षी है।
हिंदी भावार्थ: जिसे शंकर प्रिय हैं पर जो मेरा द्रोही है, और जो शिव का द्रोही होकर मेरा दास कहलाता है, वे दोनों कल्प भर घोर नरक में वास करते हैं।
Meaning: He who loves Shankara yet wrongs me, and he who calls himself my servant while scorning Shiva, both are lost; Ram and Shiva are one.
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Day 21 · Bhadrachalam — Parnasala

पर्णशालां सुविपुलां तत्र संघातमृत्तिकाम्। सुस्तम्भां मस्करैर्दीर्घैः कृतवंशां सुशोभनाम्॥
वाल्मीकि रामायण · अरण्यकाण्ड ३.१५.२१
प्रसंग: श्रीराम के कहने पर लक्ष्मण जी ने वनवास की पर्णशाला (पत्तों की कुटिया) बनाई। गोदावरी-तट पर भद्राचलम के निकट का पर्णशाला ग्राम परम्परा से उसी कुटिया की स्मृति-भूमि है, जहाँ से सीता-हरण हुआ माना जाता है।
हिंदी भावार्थ: लक्ष्मण जी ने वहाँ मिट्टी से सुदृढ़, लम्बे बाँसों के स्तम्भों वाली, अत्यन्त सुन्दर और विशाल पर्णशाला बनाई।
Meaning: There Lakshmana raised the parnashala, a spacious leaf-hut of packed earth, pillared with tall bamboo, beautiful to behold.
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Day 22 · Bastar — the Living Dandakaranya

प्रविश्य तु महारण्यं दण्डकारण्यमात्मवान्। रामो ददर्श दुर्धर्षस्तापसाश्रममण्डलम्॥
वाल्मीकि रामायण · अरण्यकाण्ड ३.१.१
प्रसंग: अरण्यकाण्ड का प्रथम श्लोक, श्रीराम का दण्डकारण्य में प्रवेश। बस्तर का यह वनांचल परम्परा से उसी जीवित दण्डकारण्य का हृदय है, जहाँ वनवास के वर्ष बीते।
हिंदी भावार्थ: आत्मसंयमी, दुर्धर्ष श्रीराम ने महारण्य दण्डकारण्य में प्रवेश कर तपस्वियों के आश्रमों का मण्डल देखा।
Meaning: Entering the vast Dandaka forest, the self-possessed, unconquerable Ram beheld the ring of hermitages of the sages.
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Day 23 · Yatra Sampoorna — the Closing Pranam

सीय राममय सब जग जानी। करउँ प्रनाम जोरि जुग पानी॥
रामचरितमानस · बालकाण्ड, दोहा ७(घ) की चौपाई
प्रसंग: तुलसीदास जी चौरासी लाख योनियों के समस्त जीवों को सीताराममय जानकर प्रणाम करते हैं, तेईस दिन में रामायण की जीवित भूमि को साक्षात् देखने के बाद, इस यात्रा का यही सार-संदेश है।
हिंदी भावार्थ: सारे जगत को सीताराममय जानकर मैं दोनों हाथ जोड़कर प्रणाम करता हूँ।
Meaning: Knowing the whole world to be filled with Sita and Ram, I fold both palms and bow to all.
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Walk these verses on the ground they describe — the 23-day Shri Ramayana Yatra, India's most complete Ramayana tour package, with an optional Sri Lanka extension covering the Sundara and Yuddha Kanda sites. Fixed Friday departures · pure-veg · for pilgrims in India & abroad.